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Godham Pathmeda

Wednesday, January 19, 2011

गोवंश को बचाने के लिए आगे आएं- दत्तशरणानंद महाराज

भास्कर न्यूज. चैन्नई।
निराश्रित गोवंश को बचाने के लिए हम आगे आए। गोसेवा एवं गोसंवर्धन करे। गोभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराए तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहे। गोधाम पथमेड़ा प्रधान संरक्षक एवं संस्थापक स्वामी दत्तशरणानंद महाराज ने यह बात कही। वे चैन्नई महानगर में गोकथा महोत्सव के दौरान उपस्थित गोभक्तों को उदबोधन दे रहे थे। गोकथा महोत्सव 12 जनवरी से शुरू होकर 16 जनवरी को सम्पन्न हुआ। कामधेनू कल्याण परिवार तमिलनाडू चैन्नई के तत्वावधान में आयोजित कथा में उन्होंनें कहा कि आज गोवशं कमाई के लिए कत्लखाने ले जाई जा रही है। गोभक्त आज आवारा हो गया है। इसलिये गाय बैचारा हो गई है। सारे प्राणियों में गोमाता पवित्र है। सबको जोडऩे वाली गोमाता की हम उपेक्षा कर रहे है। चैन्नई महानगर के वैपेरी उपनगर के ईवीके सम्पत्त रोड़ पर चुलै बस स्टेण्ड़ के पास पीटीसी चैंगलवाराय नाईकन ट्रस्ट में आयोजित कथा स्थल पर उन्होंने गो प्रेमियों से आह्वान किया कि हम भोजन से पहले गोग्रास अवश्य निकाले। गो से प्राप्त वस्तुओं का सेवन करे तथा गो गव्यों का उपयोग अधिक से अधिक करे। उन्होंनें गोमाता की महिमा को बड़े ही तार्किक एवं सरल रूप में समझाते हुए कहा कि जीवन में सम्पूर्ण शांतिमय यात्रा करनी हो तो गोमाता की सेवा अवश्य करनी चाहिए। गाय सभी को आनंद एवं शांति देती है। गाय को साक्षात भगवान का रूप बताया गया है। हम गाय की महिमा भूल गए है। गो माता के गुणगान को गोविंद की महिमा दी गई है।
मकर सक्रांति के पूण्य पर्व के मौके पर निराश्रित लाखों गोवंश के सेवार्थ एवं संरक्षणार्थ यहां आयोजित महोत्सव स्थल पर दत्तशरणानंद महाराज ने कहा कि सबका पालन पोषण गोमाता करती है। बौद्धिक एवं आध्यात्मिकता से भी गोमाता का अनंत उपकार है। गाय का स्थान बहुत ऊंचा है, लेकिन विडबंना है कि आज गोवंश दुखी है। संसार में भगवान से भी गाय का स्थान है। जन्म देने वाली माता से भी कई गुणा ऊंचा स्थान गाय को दिया गया है। गोमाता की अंनत शक्ति है। पवित्रता व शांति देती है। गाय से अधिक समरस कोई नही है। गोमाता सभी मजहबों व सम्प्रदायों से ऊपर है। गाय भारत का विराट रूप है। जहां सम्पूर्ण ब्रह्मांड को पोषण करने वाली गाय माता है।
भारत का मूल आधार गाय :-
जीतों प्रेरक गणिवर्य नयपदमसागर महाराज ने कहा कि भारत वर्ष का मूल आधार गाय है। इसकी जितनी सेवा की जाए कम है। उन्होंनें कहा कि यह हमारे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि गाय कत्लखाने जाती है। सारे प्राणियों की माता गाय है। नयपदमसागर महाराज ने कहा कि भारत भूमि महावीर, राम एवं कृष्ण की भूमि है। सभी कथाओं में गोकथा सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंनें कहा कि मजहब एवं रंग अलग हो सकते है, लेकिन धर्म एक है। भारत में गो बचाने के लिए पवित्र आंदोलन करना पड़ेगा। समग्र राष्ट्र में गोवंश को कत्लखाने से बचाने के लिए अतिशीघ्र मास्टर प्लॉन बनाया जा रहा है। जिसमें प्रवासी एवं आप्रवासी गोभक्तों सहित दानदाताओं का सहयोग लेकर इस नेक कार्य को अतिशीघ्र शुरू किया जाएगा। गो वेज्ञानिक उत्तम महाश्वेरी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
योग शिविर भी सम्पन्न :-
गोकथा महोत्सव के साथ योग शिविर भी सम्पन्न हो गया। प्रतिदिन सुबह महंत योगी सूरजनाथ महाराज पांचला सिद्धा जिला नागोर ने योग के माध्यम से लोगों को स्वस्थ रहने की प्रेरणा दी। उन्होंनें योग की महत्ता पर प्रकाश डाला और योगासन करवााए। उन्होंने सही तरीके से आसन करने के तरीके भी बताए। महोत्सव के शुरूआत के दो दिनों तक बाल व्यास राधाकृष्ण महाराज ने नरसीजी की हुंडी में ज्ञान की गंगा बहाई।
जांगीड़ ने लिया आशीर्वाद :-
इस अवसर पर महंत योगी सूरजनाथ महाराज, दीनदयाल महाराज, गोविंदवल्लभ ब्रह्मचारी, महंत रघुनाथभारती, मातृशक्ति गोशाला रेण के संस्थापक हरेकृष्ण हरेराम महाराज समेत अन्य संत-महात्मा उपस्थित थे। चैन्नई उपनगर इलाके के पुलिस आयुक्त एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सांगाराम जांगीड़ जिला बाड़मेर ने भी महोत्सव स्थल पर संतो से आशीर्वाद प्राप्त किया। हिंदू मुन्नानी के संस्थापक रामगोपालन, विधायक बाबु, काऊंसलर मूरली, एमसी देवराजन, जयरामण के साथ भी तमिलनाडू प्रदेश के मिडीया जगत की कई हस्तियों ने भी भाग लिया।
पंच गव्य औषधिया खरीदी :-
महोत्सव स्थल पर पथमेड़ा गोशाला स्थल में निर्मित सामग्री खरीदने के प्रति भी भक्तों का उत्साह देखने को मिला। भक्तों ने पंच गव्य औषधियों जिनमे गोमूत्र अर्क, गोमूत्र आशव, गोतीर्थ कामधेनू कैंसर योग, बालपास रस, प्रमेहारी, नारी संजीवनी, कामधेनू धनवटी, कामधेनू सैंपू, अमृतधारा सहित अन्य पंच गव्य औषधियां खरीदने के प्रति रूची दिखाई।
विभिन्न स्थानों से पहुंचे भक्तगण :-
गोकथा सुनने के लिए चैन्नई के साहुकारपेट, चुलै, वेपैरी, एमके बी नगर, तंडियारपेट, तिरूवतियुर, मनड़ी समेत विभिन्न इलाकों से भक्तगण पहुंचे। चैन्नई के अलावा बैंगलूर, हैदराबाद, अहमदाबाद, अंकलेश्वर, सूरत, मदूरे, सैलम, कौयम्बतूर, तिरूची एवं राजस्थान के विभिन्न इलाकों से भी भक्तगण यहां पहुंचे और कथा का श्रवण किया। गोभक्तों के लिए कथा स्थल पर पहुंचने के लिए बसों की विशेष व्यवस्था की गई थी। चुलै हन्टर्स रोड़ पर मलैचा गार्डन में महाप्रसादी का आयोजन रखा गया, जिसमें सभी भक्तों ने उत्साह से भाग लिया।
कृष्ण के दर्शन गाय से ही :-
गोक्रांति अग्रदूत श्री गोपालमीणी महाराज ने गोकथा के दौरान कहा कि गोविंद एवं कृष्ण के दर्शन गाय से ही होते है। हर मनुष्य गाय को पाले, यदि न भी पाल सके तो उसे ह्द्रय में बसा ले। गाय का कार्य करने से ही हमे राम एवं कृष्ण मिलते है। उन्होंने कहा कि गाय की दिशा से ऋषियों को दिशा मिलती है। मनुष्य को गोदान करना चाहिए। जो गाय का बन जाता है वही गुरू का शिष्य बन जाता है। इस अवसर पर गोभक्तों ने कथा के दौरान हाथ उठाकर गोसेवा एवं गोसंवर्धन का संकल्प लिया। श्री गोपालमणी महाराज ने व्यसन मुक्ति पर बल दिया और कहा कि देश की स्थापना गौऋषियों से हुई है, लेकिन आज विडंबना यह है कि इस देश की सत्ता ऐसे लोगों के हाथ में है, जो गाय की रक्षा सही तरीके से नही कर पा रही है।
कार्यक्रम का संचालन ओम आचार्य के द्वारा किया गया। इस महोत्सव का पांच दिन तक समग्र विश्व में दिशा चैनल के द्वारा सीधा प्रसारण किया गया। गोभक्तों ने गो सेवा के लिए मुक्त हस्त से धन का दान भी दिया। गोधाम प्रचार विभाग के राव गुमानसिंह रानीवाड़ा एवं गणपत सुथार ने भी विशेष सहयोग प्रदान किया। सूरत से आए गो भक्त अर्जुनसिंह राजपुरोहित, जगदीश परिहार सहित श्रवणसिंह राव ने भी सहयोग प्रदान किया।

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